(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    


॥ श्रीः ॥
7.6. अध्यायः 006
Mahabharata - Drona Parva - Chapter Topics
दुर्योधनेन द्रोणम्प्रति सैनापत्यस्वीकारप्रार्थना॥ 1 ॥


Mahabharata - Drona Parva - Chapter Text

सञ्जय उवाच। 7-1-0x(4274)(44809)
कर्णस्य वचनं श्रुत्वा राजा दुर्योधनस्तदा।
सेनामध्यगतं द्रोणमिदं वचनमब्रवीत्॥ 7-1-1(44810)
दुर्योधन उवाच। 7-1-2x(4275)
वर्णश्रैष्ठ्यात्कुलोत्पत्त्या श्रुतेन वयसा धिया।
वीर्याद्दाक्ष्यादधृष्यत्वादर्थज्ञानान्नयाज्जयात्॥ 7-1-2(44811)
तपसा च कृतज्ञत्वाद्वृद्धः सर्वगुणैरपि।
युक्तो भवत्सश्रो गोप्ता राज्ञामन्यो न विद्यते॥ 7-1-3(44812)
स भवान्पातु नः सर्वान्देवानिव शतक्रतुः।
भवन्नेत्राः पराञ्जेतुमिच्छामो द्विजसत्तम॥ 7-1-4(44813)
रुद्राणामिव कापालिर्वसूनामिव पावकः।
कुबेर इव यक्षाणां मरुतामिव वासवः॥ 7-1-5(44814)
वसिष्ठ इव विप्राणां तेजसामिव भास्करः।
पितॄणामिव धर्मेन्द्रो यादसामिव चाम्बुराट्॥ 7-1-6(44815)
नक्षत्राणामिव शशी दितिजानामिवोशनाः।
`सर्वेषामिव लोकानां विश्वस्य च यथा क्षयः'॥ 7-1-7(44816)
विश्वोत्पत्तिस्थितिलये श्रेष्ठो नारायणः प्रभुः।
एवं सेनाप्रणेतॄणां मम सेनापतिर्भव॥ 7-1-8(44817)
अक्षौहिण्यो दशैका च वशगाः सन्तु तेऽनघ।
ताभिः शत्रून्प्रतिव्यूह्य जहीन्द्रो दानवानिव॥ 7-1-9(44818)
प्रयातु नो भवानग्रे देवानामिव पावकिः।
अनुयास्यामहे त्वाऽऽजौ सौरभेया इवर्षभम्॥ 7-1-10(44819)
उग्रधन्वा महेष्वासो दिव्यं विष्फारयन्धनुः।
दृष्ट्वा भवन्तं सङ्ग्रामे नार्जुनः प्रहरिष्यति॥ 7-1-11(44820)
ध्रुवं युधिष्ठिरं सङ्ख्ये सानुबन्धं सबान्धवम्।
जेष्यामि पुरुषव्याघ्र भवान्सेनापतिर्यदि॥ 7-1-12(44821)
सञ्जय उवाच। 7-1-13x(4276)
एवमुक्ते ततो द्रोणं जयेत्यूचुर्नराधिपाः।
सिंहनादेन महता हर्षयन्तस्तवात्मजम्॥ 7-1-13(44822)
सैनिकाश्च मुदा युक्ता वर्धयन्ति द्विजोत्तमम्।
दुर्योधनं पुरस्कृत्य प्रार्थयन्तो महद्यशः।
दुर्योधनं ततो राजन्द्रोणो वचनमब्रवीत्॥ ॥ 7-1-14(44823)

इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि षष्ठोऽध्यायः॥ 6 ॥

Mahabharata - Drona Parva - Chapter Footnotes

5-1-4 भवान्नेस्रं तेना येषां ते॥ 5-1-6 धर्मेन्द्रो यमः। अम्बुराट् वरुणः॥ 5-1-10 पावकिः स्कन्दः॥ 5-1-6 षष्टोऽध्यायः॥


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